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दलों में कड़ी टक्कर
48 निकायों के नतीजे घोषित होंगे
झारखंड नगर निकाय चुनाव परिणाम तय करेंगे शहरी राजनीति में किस दल का प्रभाव बढ़ेगा
27 Feb 2026, 11:13 AM
Jharkhand
-
Ranchi
Reporter :
Mahesh Sharma
Ranchi
झारखंड में आयोजित नगर निकाय चुनावों के नतीजे राज्य की शहरी राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। प्रदेश के 48 शहरी निकायों में हुए चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की नजरें मतगणना पर टिकी हुई हैं। इन चुनावों के जरिए यह साफ होगा कि शहरों में किस राजनीतिक दल या नेतृत्व का प्रभाव अधिक मजबूत है।
इस चुनाव में 9 नगर निगम, 20 नगर पालिका परिषद और 19 नगर पंचायतों के लिए मतदान कराया गया था। मेयर और अध्यक्ष पदों के साथ-साथ पार्षदों के लिए भी बड़ी संख्या में उम्मीदवार मैदान में उतरे। विभिन्न निकायों में कुल सैकड़ों प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई है, जिससे मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है।
नगर निकाय चुनाव इस बार कई मायनों में खास माने जा रहे हैं। चुनाव राजनीतिक दलों के आधिकारिक चुनाव चिह्न पर नहीं लड़े गए, बल्कि उम्मीदवारों को अलग-अलग प्रतीक दिए गए। इसके बावजूद प्रमुख दलों ने अपने समर्थित उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर पूरी ताकत झोंक दी।
राज्य के प्रमुख शहरों में मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है। कई जगहों पर सत्ताधारी गठबंधन के सहयोगी दल भी आमने-सामने दिखाई दिए, जिससे चुनावी समीकरण और जटिल हो गए। वहीं विपक्षी दलों ने भी शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है।
इस बार नगर निकाय चुनाव में पहली बार नई आरक्षण व्यवस्था लागू की गई है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों ने चुनावी गणित को प्रभावित किया है। राजनीतिक दलों को उम्मीदवार चयन में सामाजिक संतुलन का ध्यान रखना पड़ा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगर निकाय चुनावों के नतीजे राज्य की आगामी राजनीति के संकेत दे सकते हैं। शहरी मतदाताओं का रुझान राज्य सरकार और विपक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चुनाव परिणाम आने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य के शहरी क्षेत्रों में किस राजनीतिक दल की पकड़ मजबूत है और किसे आगे अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत होगी। फिलहाल मतगणना को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और उम्मीदवारों के समर्थकों में उत्सुकता बनी हुई है।
इस चुनाव में 9 नगर निगम, 20 नगर पालिका परिषद और 19 नगर पंचायतों के लिए मतदान कराया गया था। मेयर और अध्यक्ष पदों के साथ-साथ पार्षदों के लिए भी बड़ी संख्या में उम्मीदवार मैदान में उतरे। विभिन्न निकायों में कुल सैकड़ों प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई है, जिससे मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है।
नगर निकाय चुनाव इस बार कई मायनों में खास माने जा रहे हैं। चुनाव राजनीतिक दलों के आधिकारिक चुनाव चिह्न पर नहीं लड़े गए, बल्कि उम्मीदवारों को अलग-अलग प्रतीक दिए गए। इसके बावजूद प्रमुख दलों ने अपने समर्थित उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर पूरी ताकत झोंक दी।
राज्य के प्रमुख शहरों में मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है। कई जगहों पर सत्ताधारी गठबंधन के सहयोगी दल भी आमने-सामने दिखाई दिए, जिससे चुनावी समीकरण और जटिल हो गए। वहीं विपक्षी दलों ने भी शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है।
इस बार नगर निकाय चुनाव में पहली बार नई आरक्षण व्यवस्था लागू की गई है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों ने चुनावी गणित को प्रभावित किया है। राजनीतिक दलों को उम्मीदवार चयन में सामाजिक संतुलन का ध्यान रखना पड़ा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगर निकाय चुनावों के नतीजे राज्य की आगामी राजनीति के संकेत दे सकते हैं। शहरी मतदाताओं का रुझान राज्य सरकार और विपक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चुनाव परिणाम आने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य के शहरी क्षेत्रों में किस राजनीतिक दल की पकड़ मजबूत है और किसे आगे अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत होगी। फिलहाल मतगणना को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और उम्मीदवारों के समर्थकों में उत्सुकता बनी हुई है।
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