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ग्रहण के समय सतर्क रहें
होलिका दहन दिन लगेगा चंद्र ग्रहण
होली 2026 पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव, प्रेमानंद महाराज ने बताए सावधानी और उपाय
27 Feb 2026, 10:31 AM
Uttar Pradesh
-
Vrindavan
Reporter :
Mahesh Sharma
Vrindavan
साल 2026 की होली पर चंद्र ग्रहण का विशेष संयोग बन रहा है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में जिज्ञासा और हल्की चिंता भी देखी जा रही है। होलिका दहन के दिन पड़ने वाला यह चंद्र ग्रहण धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी विषय पर प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने भक्तों के सवालों का जवाब देते हुए ग्रहण के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और उपायों की जानकारी दी है।
महाराज के अनुसार चंद्र ग्रहण के समय किसी प्रकार का भय रखने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि श्रद्धा और नियमों का पालन करना ही सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि ग्रहण को आध्यात्मिक साधना का विशेष समय माना जाता है और इस दौरान भगवान का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है।
बताया गया है कि भारतीय समयानुसार यह चंद्र ग्रहण दोपहर लगभग 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। ग्रहण से पहले लगने वाले सूतक काल को भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। सूतक लगने के बाद पूजा-पाठ के नियमों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि ग्रहण शुरू होने से पहले ही भोजन कर लेना चाहिए और ग्रहण के दौरान खाने-पीने से बचना चाहिए। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को छोड़कर बाकी लोगों को उपवास या संयम रखने की सलाह दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि ग्रहण के दौरान भजन, कीर्तन और मंत्र जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को सलाह दी कि ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके घर की साफ-सफाई करें और फिर पूजा-पाठ करें। इसके साथ ही गरीबों को दान करना भी शुभ फलदायी माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण को आत्मशुद्धि और साधना का अवसर माना जाता है। इसलिए भक्तों को डरने के बजाय श्रद्धा और विश्वास के साथ नियमों का पालन करने की सलाह दी गई है।
धर्माचार्यों का मानना है कि ग्रहण का प्रभाव तभी सकारात्मक होता है जब व्यक्ति संयम, भक्ति और सत्कर्म का पालन करे। इसी कारण होली और चंद्र ग्रहण के इस दुर्लभ संयोग को आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष अवसर माना जा रहा है।
महाराज के अनुसार चंद्र ग्रहण के समय किसी प्रकार का भय रखने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि श्रद्धा और नियमों का पालन करना ही सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि ग्रहण को आध्यात्मिक साधना का विशेष समय माना जाता है और इस दौरान भगवान का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है।
बताया गया है कि भारतीय समयानुसार यह चंद्र ग्रहण दोपहर लगभग 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। ग्रहण से पहले लगने वाले सूतक काल को भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। सूतक लगने के बाद पूजा-पाठ के नियमों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि ग्रहण शुरू होने से पहले ही भोजन कर लेना चाहिए और ग्रहण के दौरान खाने-पीने से बचना चाहिए। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को छोड़कर बाकी लोगों को उपवास या संयम रखने की सलाह दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि ग्रहण के दौरान भजन, कीर्तन और मंत्र जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को सलाह दी कि ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके घर की साफ-सफाई करें और फिर पूजा-पाठ करें। इसके साथ ही गरीबों को दान करना भी शुभ फलदायी माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण को आत्मशुद्धि और साधना का अवसर माना जाता है। इसलिए भक्तों को डरने के बजाय श्रद्धा और विश्वास के साथ नियमों का पालन करने की सलाह दी गई है।
धर्माचार्यों का मानना है कि ग्रहण का प्रभाव तभी सकारात्मक होता है जब व्यक्ति संयम, भक्ति और सत्कर्म का पालन करे। इसी कारण होली और चंद्र ग्रहण के इस दुर्लभ संयोग को आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष अवसर माना जा रहा है।
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