Search News
Tip: Search by heading, content, category, city, state, highlights.
- Select Location
- ताज़ा खबर
- राष्ट्रीय (भारत)
- अंतरराष्ट्रीय
- राज्य व क्षेत्रीय
- राजनीति
- सरकार व प्रशासन
- नीति व नियम
- न्यायालय व न्यायपालिका
- कानून व्यवस्था
- अपराध
- साइबर अपराध व डिजिटल सुरक्षा
- रक्षा
- सुरक्षा व आतंकवाद
- अर्थव्यवस्था (मैक्रो)
- व्यापार व कॉरपोरेट
- बैंकिंग व भुगतान
- स्टार्टअप व उद्यमिता
- टेक्नोलॉजी
- विज्ञान व अनुसंधान
- पर्यावरण
- मौसम
- आपदा व आपातकाल
- स्वास्थ्य
- फिटनेस व वेलनेस
- शिक्षा
- नौकरी व करियर
- कृषि
- ग्रामीण विकास
- परिवहन
- दुर्घटना व सुरक्षा
- ऑटोमोबाइल व ईवी
- खेल
- मनोरंजन
- धर्म व अध्यात्म
- समाज व सामाजिक मुद्दे
- लाइफस्टाइल
- यात्रा व पर्यटन
- जन सेवा व अलर्ट
- जांच व विशेष रिपोर्ट
- प्रतियोगी परीक्षाएँ
- खेल (अन्य)
Choose Location
Current:
India
Country: India
Selected State: None
रहस्यमयी शोम्पेन जनजाति की दुनिया
बाहरी दुनिया से लगभग अलग रहते हैं शोम्पेन जनजाति लोग
ग्रेट निकोबार के घने जंगलों में रहने वाली शोम्पेन जनजाति आज भी दुनिया से दूर
24 Feb 2026, 12:55 PM
Andaman and Nicobar Islands
-
Nicobar
Reporter :
Mahesh Sharma
Nicobar
भारत के अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के ग्रेट निकोबार द्वीप में रहने वाली शोम्पेन जनजाति दुनिया की सबसे रहस्यमयी और अलग-थलग रहने वाली जनजातियों में गिनी जाती है। इस जनजाति के लोगों को बहुत कम लोगों ने करीब से देखा है, क्योंकि ये बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग रहना पसंद करते हैं।
शोम्पेन जनजाति मुख्य रूप से ग्रेट निकोबार के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में निवास करती है। इनका जीवन प्रकृति पर आधारित है और ये शिकार, जंगलों से मिलने वाले फल-फूल तथा प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहते हैं। आधुनिक जीवनशैली से दूर ये लोग पारंपरिक तरीकों से जीवन बिताते हैं और अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार शोम्पेन जनजाति का बाहरी दुनिया से संपर्क बेहद सीमित है। यही कारण है कि इनके रहन-सहन, भाषा और परंपराओं के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। यह जनजाति आमतौर पर बाहरी लोगों से दूरी बनाए रखती है और अपने इलाके में किसी भी तरह की बाहरी दखलंदाजी पसंद नहीं करती।
भारत सरकार ने इन जनजातियों की सुरक्षा और संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए विशेष नियम बनाए हैं। इनके रहने वाले क्षेत्रों में आम लोगों के प्रवेश पर सख्त नियंत्रण रखा जाता है, ताकि जनजाति की पारंपरिक जीवनशैली पर कोई असर न पड़े। यही वजह है कि शोम्पेन जनजाति के बारे में जानकारी सीमित है और इनके जीवन से जुड़ी कई बातें अब भी रहस्य बनी हुई हैं।
मानवशास्त्रियों का मानना है कि शोम्पेन जनजाति प्राचीन समय से ही इस क्षेत्र में निवास करती आ रही है। इनकी भाषा और जीवनशैली अन्य जनजातियों से काफी अलग मानी जाती है। आधुनिक तकनीक और विकास के प्रभाव से दूर रहने के कारण इनकी संस्कृति आज भी काफी हद तक मूल रूप में सुरक्षित है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि इस तरह की जनजातियों का संरक्षण बेहद जरूरी है, क्योंकि ये मानव सभ्यता के शुरुआती स्वरूप और पारंपरिक जीवनशैली को समझने में मदद करती हैं। शोम्पेन जनजाति का अस्तित्व भारत की सांस्कृतिक विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
ग्रेट निकोबार में रहने वाली यह जनजाति आज भी रहस्य और जिज्ञासा का विषय बनी हुई है। सीमित संपर्क और सरकारी सुरक्षा के कारण शोम्पेन लोगों की दुनिया आम लोगों के लिए अब भी अनजानी बनी हुई है।
शोम्पेन जनजाति मुख्य रूप से ग्रेट निकोबार के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में निवास करती है। इनका जीवन प्रकृति पर आधारित है और ये शिकार, जंगलों से मिलने वाले फल-फूल तथा प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहते हैं। आधुनिक जीवनशैली से दूर ये लोग पारंपरिक तरीकों से जीवन बिताते हैं और अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार शोम्पेन जनजाति का बाहरी दुनिया से संपर्क बेहद सीमित है। यही कारण है कि इनके रहन-सहन, भाषा और परंपराओं के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। यह जनजाति आमतौर पर बाहरी लोगों से दूरी बनाए रखती है और अपने इलाके में किसी भी तरह की बाहरी दखलंदाजी पसंद नहीं करती।
भारत सरकार ने इन जनजातियों की सुरक्षा और संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए विशेष नियम बनाए हैं। इनके रहने वाले क्षेत्रों में आम लोगों के प्रवेश पर सख्त नियंत्रण रखा जाता है, ताकि जनजाति की पारंपरिक जीवनशैली पर कोई असर न पड़े। यही वजह है कि शोम्पेन जनजाति के बारे में जानकारी सीमित है और इनके जीवन से जुड़ी कई बातें अब भी रहस्य बनी हुई हैं।
मानवशास्त्रियों का मानना है कि शोम्पेन जनजाति प्राचीन समय से ही इस क्षेत्र में निवास करती आ रही है। इनकी भाषा और जीवनशैली अन्य जनजातियों से काफी अलग मानी जाती है। आधुनिक तकनीक और विकास के प्रभाव से दूर रहने के कारण इनकी संस्कृति आज भी काफी हद तक मूल रूप में सुरक्षित है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि इस तरह की जनजातियों का संरक्षण बेहद जरूरी है, क्योंकि ये मानव सभ्यता के शुरुआती स्वरूप और पारंपरिक जीवनशैली को समझने में मदद करती हैं। शोम्पेन जनजाति का अस्तित्व भारत की सांस्कृतिक विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
ग्रेट निकोबार में रहने वाली यह जनजाति आज भी रहस्य और जिज्ञासा का विषय बनी हुई है। सीमित संपर्क और सरकारी सुरक्षा के कारण शोम्पेन लोगों की दुनिया आम लोगों के लिए अब भी अनजानी बनी हुई है।
ADVERTISEMENT
Sponsored
More News
एआई अपडेट से स्टार्टअप बंद होने का दावा, फाउंडर ने बताया कैसे खत्म हुआ कारोबार अचानक
February 27, 2026
अफगानिस्तान को कड़ी चेतावनी पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संघर्ष तेज होने संकेत दिए
February 27, 2026
अफगान संघर्ष के बीच पाकिस्तानी लड़ाकू विमान गिराने के दावों पर सोशल मीडिया में चर्चा तेज
February 27, 2026
लखनऊ में खाद्य विभाग की बड़ी छापेमारी, नकली मसाले और खोया जब्त कर कार्रवाई
February 27, 2026
संभल में रंग एकादशी जुलूस और जुम्मे नमाज को लेकर प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की
February 27, 2026
संजू सैमसन की बल्लेबाजी पर उठे सवाल, गावस्कर ने लगातार एक जैसी गलती बताई वजह
February 27, 2026
बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी पर सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में कटौती करेगा तेलंगाना प्रशासन जल्द
February 27, 2026
पूर्व मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम ने डीएमके का दामन थामा, चुनाव से पहले सियासत गरमाई तमिलनाडु में
February 27, 2026
दिल्ली में आयुष्मान योजना का विस्तार, दिव्यांग और जरूरतमंद परिवारों को मिलेगा मुफ्त इलाज लाभ
February 27, 2026
अग्रिम जमानत पर फैसला अहम, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई आज
February 27, 2026
ADVERTISEMENT
Sponsored
Open
Loading more…