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55 हजार करोड़ नुकसान
24 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज
चार वर्षों में ₹55,000 करोड़ की साइबर ठगी, शिकायतों में अभूतपूर्व उछाल: गृह मंत्रालय
13 Feb 2026, 03:46 PM
Delhi
-
New Delhi
Reporter :
Mahesh Sharma
New Delhi
देश में साइबर ठगी के मामलों में बीते कुछ वर्षों के दौरान तेज़ी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। Ministry of Home Affairs ने संसद के उच्च सदन Rajya Sabha में लिखित जवाब में बताया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच साइबर अपराधियों ने कुल मिलाकर ₹55,000 करोड़ से अधिक की ठगी को अंजाम दिया।
गृह मंत्रालय के अनुसार, डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ साइबर अपराधों के तौर-तरीकों में भी तेजी से बदलाव आया है। 2025 में ही ₹22,495 करोड़ की ठगी दर्ज की गई, जो अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक आंकड़ा है। इसी वर्ष 24 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, जो रिकॉर्ड स्तर पर हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो 2021 में कुल 2,62,846 शिकायतें दर्ज हुई थीं। यह संख्या 2022 में बढ़कर 6,94,446 हो गई। 2023 में 13,10,357 और 2024 में 19,18,835 शिकायतें दर्ज की गईं। इस क्रमिक वृद्धि से साफ है कि साइबर अपराधों का दायरा लगातार फैल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी कॉल, फिशिंग लिंक, निवेश के नाम पर ठगी, लोन ऐप घोटाले और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों ने आम नागरिकों को निशाना बनाया है। कई मामलों में अपराधी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं, जिससे जांच एजेंसियों के सामने चुनौती और बढ़ जाती है।
सरकार ने इन अपराधों से निपटने के लिए साइबर क्राइम पोर्टल को मजबूत करने, राज्यों में साइबर पुलिस स्टेशनों की संख्या बढ़ाने और जागरूकता अभियानों को तेज करने की बात कही है। इसके अलावा बैंकों और डिजिटल भुगतान कंपनियों के साथ समन्वय बढ़ाकर संदिग्ध लेन-देन को तुरंत रोकने की व्यवस्था भी विकसित की जा रही है।
गृह मंत्रालय ने यह भी बताया कि शिकायतों के त्वरित निपटारे और धन की रिकवरी के लिए तकनीकी प्लेटफॉर्म को उन्नत किया जा रहा है। हालांकि बढ़ते मामलों को देखते हुए विशेषज्ञों ने नागरिकों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है।
कुल मिलाकर, संसद में पेश आंकड़े यह संकेत देते हैं कि साइबर सुरक्षा अब राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। डिजिटल इंडिया के दौर में तकनीक के साथ सुरक्षा उपायों को समान गति से आगे बढ़ाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ साइबर अपराधों के तौर-तरीकों में भी तेजी से बदलाव आया है। 2025 में ही ₹22,495 करोड़ की ठगी दर्ज की गई, जो अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक आंकड़ा है। इसी वर्ष 24 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, जो रिकॉर्ड स्तर पर हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो 2021 में कुल 2,62,846 शिकायतें दर्ज हुई थीं। यह संख्या 2022 में बढ़कर 6,94,446 हो गई। 2023 में 13,10,357 और 2024 में 19,18,835 शिकायतें दर्ज की गईं। इस क्रमिक वृद्धि से साफ है कि साइबर अपराधों का दायरा लगातार फैल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी कॉल, फिशिंग लिंक, निवेश के नाम पर ठगी, लोन ऐप घोटाले और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों ने आम नागरिकों को निशाना बनाया है। कई मामलों में अपराधी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं, जिससे जांच एजेंसियों के सामने चुनौती और बढ़ जाती है।
सरकार ने इन अपराधों से निपटने के लिए साइबर क्राइम पोर्टल को मजबूत करने, राज्यों में साइबर पुलिस स्टेशनों की संख्या बढ़ाने और जागरूकता अभियानों को तेज करने की बात कही है। इसके अलावा बैंकों और डिजिटल भुगतान कंपनियों के साथ समन्वय बढ़ाकर संदिग्ध लेन-देन को तुरंत रोकने की व्यवस्था भी विकसित की जा रही है।
गृह मंत्रालय ने यह भी बताया कि शिकायतों के त्वरित निपटारे और धन की रिकवरी के लिए तकनीकी प्लेटफॉर्म को उन्नत किया जा रहा है। हालांकि बढ़ते मामलों को देखते हुए विशेषज्ञों ने नागरिकों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है।
कुल मिलाकर, संसद में पेश आंकड़े यह संकेत देते हैं कि साइबर सुरक्षा अब राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। डिजिटल इंडिया के दौर में तकनीक के साथ सुरक्षा उपायों को समान गति से आगे बढ़ाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
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