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तेजस विमान जांच बाद
तीन हादसों के बाद, एयरफोर्स करेगी नए विमान का परीक्षण
तेजस Mk1A की गहन जांच के बाद ही एयरफोर्स में शामिल होगा नया लड़ाकू विमान
23 Feb 2026, 03:20 PM
Karnataka
-
Bengaluru
Reporter :
Mahesh Sharma
Bengaluru
भारतीय वायुसेना ने अपने स्वदेशी विकसित तेजस Mk1A लड़ाकू विमान को फ्रंटलाइन स्क्वाड्रन में शामिल करने से पहले गहन परीक्षण करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय हाल ही में तेजस के एक और हादसे के बाद लिया गया है, जिसमें वायुसेना ने अपना एक LCA (Light Combat Aircraft) खो दिया था। इस प्रकार के हादसों ने वायुसेना के उच्च अधिकारियों को सतर्क कर दिया है और वे नए और एडवांस संस्करण के विमानों को अपनाने में पूरी सावधानी बरतना चाहते हैं।
तेजस Mk1A विमान की डिलीवरी में पहले ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के कारण लगभग दो साल की देरी हो चुकी है। भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि नए विमान की सभी क्षमताओं और सुरक्षा मानकों की पूरी तरह से जांच की जाए। वायुसेना ने स्पष्ट किया है कि विमान को फ्रंटलाइन सेवा में शामिल करने से पहले तीन मुख्य कारकों का परीक्षण किया जाएगा।
पहला, मिसाइल दागने की शक्ति, जो युद्ध में विमान की अहम भूमिका तय करेगी। दूसरा, रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की दक्षता, जिससे विमान का पता लगाने और खुद को बचाने की क्षमता सुनिश्चित हो। तीसरा, एविएशन सुरक्षा मानक, जिसमें इंजन, नियंत्रण प्रणाली और आपातकालीन प्रक्रियाओं का परीक्षण शामिल है। इन तीन कारकों में किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।
एयरफोर्स का यह कदम केवल सुरक्षा के लिहाज से ही नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। 2024 से अब तक तीन तेजस विमान खो चुके वायुसेना अधिकारियों का कहना है कि नए Mk1A संस्करण में कई तकनीकी सुधार किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद विमान को टेस्टिंग और वास्तविक परिस्थितियों में परखना अनिवार्य है।
वायुसेना अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल 2026 में प्रारंभिक परीक्षण कार्यक्रम शुरू होगा। इस परीक्षण के दौरान विमान की उड़ान क्षमता, हथियार प्रणाली, रडार व इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और पायलट के नियंत्रण अनुभव का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि परीक्षण संतोषजनक पाया गया तो ही Mk1A को स्क्वाड्रन में शामिल किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, तेजस Mk1A के फ्रंटलाइन में आने से भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता में वृद्धि होगी और यह देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत बनाएगा। इसके अलावा, यह भारत के स्वदेशी विमान विकास कार्यक्रम के लिए एक बड़ा सफलता संकेत भी होगा।
हालांकि विमान का परीक्षण और स्क्वाड्रन में शामिल करना एक लंबी प्रक्रिया है, फिर भी यह कदम भारतीय वायुसेना की भविष्य की तैयारियों और स्वदेशी रक्षा उद्योग की क्षमता को दर्शाता है।
तेजस Mk1A विमान की डिलीवरी में पहले ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के कारण लगभग दो साल की देरी हो चुकी है। भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि नए विमान की सभी क्षमताओं और सुरक्षा मानकों की पूरी तरह से जांच की जाए। वायुसेना ने स्पष्ट किया है कि विमान को फ्रंटलाइन सेवा में शामिल करने से पहले तीन मुख्य कारकों का परीक्षण किया जाएगा।
पहला, मिसाइल दागने की शक्ति, जो युद्ध में विमान की अहम भूमिका तय करेगी। दूसरा, रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की दक्षता, जिससे विमान का पता लगाने और खुद को बचाने की क्षमता सुनिश्चित हो। तीसरा, एविएशन सुरक्षा मानक, जिसमें इंजन, नियंत्रण प्रणाली और आपातकालीन प्रक्रियाओं का परीक्षण शामिल है। इन तीन कारकों में किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।
एयरफोर्स का यह कदम केवल सुरक्षा के लिहाज से ही नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। 2024 से अब तक तीन तेजस विमान खो चुके वायुसेना अधिकारियों का कहना है कि नए Mk1A संस्करण में कई तकनीकी सुधार किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद विमान को टेस्टिंग और वास्तविक परिस्थितियों में परखना अनिवार्य है।
वायुसेना अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल 2026 में प्रारंभिक परीक्षण कार्यक्रम शुरू होगा। इस परीक्षण के दौरान विमान की उड़ान क्षमता, हथियार प्रणाली, रडार व इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और पायलट के नियंत्रण अनुभव का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि परीक्षण संतोषजनक पाया गया तो ही Mk1A को स्क्वाड्रन में शामिल किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, तेजस Mk1A के फ्रंटलाइन में आने से भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता में वृद्धि होगी और यह देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत बनाएगा। इसके अलावा, यह भारत के स्वदेशी विमान विकास कार्यक्रम के लिए एक बड़ा सफलता संकेत भी होगा।
हालांकि विमान का परीक्षण और स्क्वाड्रन में शामिल करना एक लंबी प्रक्रिया है, फिर भी यह कदम भारतीय वायुसेना की भविष्य की तैयारियों और स्वदेशी रक्षा उद्योग की क्षमता को दर्शाता है।
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