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दावेदारी से बढ़ी विपक्षी चिंता
राज्यसभा चुनाव समीकरण से गठबंधन दलों में असमंजस बढ़ा
राज्यसभा चुनाव में शरद पवार की दावेदारी से विपक्षी दलों की रणनीति उलझी नजर आ रही
26 Feb 2026, 01:17 PM
Maharashtra
-
Mumbai
Reporter :
Mahesh Sharma
Mumbai
महाराष्ट्र में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सात सीटों पर होने वाले चुनाव के बीच वरिष्ठ नेता शरद पवार की संभावित उम्मीदवारी ने विपक्षी दलों के भीतर नई चर्चा शुरू कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस दावेदारी से विपक्षी गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच तालमेल की चुनौती बढ़ सकती है।
महाराष्ट्र विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। विधानसभा में विपक्षी दलों की संख्या सीमित होने के कारण उम्मीदवार चयन और समर्थन जुटाना उनके लिए आसान नहीं माना जा रहा है। ऐसे में एक ही सीट के लिए कई दावेदारों की मौजूदगी से समीकरण जटिल हो सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार शरद पवार को फिर से राज्यसभा भेजने की कोशिशें तेज हैं। उनका कार्यकाल समाप्त होने के करीब है और पार्टी नेतृत्व उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय बनाए रखना चाहता है। हालांकि इस दावेदारी ने विपक्षी सहयोगियों के सामने नई रणनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।
कांग्रेस और उद्धव ठाकरे गुट के नेताओं के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि सीमित संख्या के बीच किस उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाए। विपक्षी दलों के पास संयुक्त रूप से एक सीट जीतने की संभावना बताई जा रही है, लेकिन उम्मीदवार तय करने को लेकर सहमति बनाना आसान नहीं होगा।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस चुनाव में केवल सीट जीतना ही चुनौती नहीं है, बल्कि गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा। अगर किसी एक दल को ज्यादा महत्व मिलता है तो दूसरे दलों में असंतोष बढ़ सकता है।
कुछ नेताओं को यह भी आशंका है कि भविष्य में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं और दलों के बीच नए गठजोड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी कारण राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति बेहद सावधानी से बनाई जा रही है।
महाराष्ट्र की राजनीति में राज्यसभा चुनाव अक्सर बड़े राजनीतिक संदेश देते हैं। इस बार भी चुनाव को विपक्षी दलों की एकजुटता और राजनीतिक ताकत की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नाम तय होने के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल सभी दल अपने-अपने स्तर पर बातचीत कर रहे हैं और जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं।
महाराष्ट्र विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। विधानसभा में विपक्षी दलों की संख्या सीमित होने के कारण उम्मीदवार चयन और समर्थन जुटाना उनके लिए आसान नहीं माना जा रहा है। ऐसे में एक ही सीट के लिए कई दावेदारों की मौजूदगी से समीकरण जटिल हो सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार शरद पवार को फिर से राज्यसभा भेजने की कोशिशें तेज हैं। उनका कार्यकाल समाप्त होने के करीब है और पार्टी नेतृत्व उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय बनाए रखना चाहता है। हालांकि इस दावेदारी ने विपक्षी सहयोगियों के सामने नई रणनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।
कांग्रेस और उद्धव ठाकरे गुट के नेताओं के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि सीमित संख्या के बीच किस उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाए। विपक्षी दलों के पास संयुक्त रूप से एक सीट जीतने की संभावना बताई जा रही है, लेकिन उम्मीदवार तय करने को लेकर सहमति बनाना आसान नहीं होगा।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस चुनाव में केवल सीट जीतना ही चुनौती नहीं है, बल्कि गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा। अगर किसी एक दल को ज्यादा महत्व मिलता है तो दूसरे दलों में असंतोष बढ़ सकता है।
कुछ नेताओं को यह भी आशंका है कि भविष्य में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं और दलों के बीच नए गठजोड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी कारण राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति बेहद सावधानी से बनाई जा रही है।
महाराष्ट्र की राजनीति में राज्यसभा चुनाव अक्सर बड़े राजनीतिक संदेश देते हैं। इस बार भी चुनाव को विपक्षी दलों की एकजुटता और राजनीतिक ताकत की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नाम तय होने के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल सभी दल अपने-अपने स्तर पर बातचीत कर रहे हैं और जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं।
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