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जेल टिप्पणी पर साधी चुप्पी
जौनपुर दौरे में मीडिया सवालों पर प्रतिक्रिया देने से बचे
अखिलेश के बयान पर रामभद्राचार्य मौन, सवाल सुनते ही कार का शीशा बंद किया
27 Feb 2026, 12:49 PM Uttar Pradesh - Jaunpur
Reporter : Mahesh Sharma
Jaunpur समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान को लेकर जगद्गुरु रामभद्राचार्य चर्चा में हैं। अखिलेश यादव द्वारा पुराने मुकदमे का जिक्र करते हुए उन्हें जेल भेजने संबंधी टिप्पणी के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस तेज हो गई है। इस बीच जौनपुर दौरे पर पहुंचे रामभद्राचार्य ने मीडिया के सवालों पर चुप्पी साध ली।

बताया जा रहा है कि रामभद्राचार्य गुरुवार को जौनपुर के शीतला चौकिया धाम के पास एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम स्थल से लौटते समय जब पत्रकारों ने उनसे अखिलेश यादव के बयान पर प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सवाल सुनते ही उन्होंने अपनी कार का शीशा बंद कर लिया और वहां से रवाना हो गए।

हाल ही में लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने रामभद्राचार्य से जुड़े एक पुराने धोखाधड़ी मामले का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि अगर उनकी सरकार बनती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया और विभिन्न दलों तथा धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

रामभद्राचार्य पिछले कुछ समय से अन्य धार्मिक नेताओं के साथ मतभेदों को लेकर भी चर्चा में हैं। खासतौर पर कुछ संतों के साथ चल रहे विवादों ने इस मुद्दे को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में अखिलेश यादव का बयान राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है।

जौनपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान रामभद्राचार्य हेलीकॉप्टर से पहुंचे थे और उन्होंने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौजूद रहे। हालांकि उन्होंने मंच से किसी भी राजनीतिक मुद्दे पर टिप्पणी करने से परहेज किया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए धार्मिक और राजनीतिक मुद्दे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ रहे हैं। नेताओं के बयान और धार्मिक व्यक्तित्वों की प्रतिक्रियाएं राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती हैं।

फिलहाल रामभद्राचार्य की चुप्पी को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे विवाद से दूरी बनाए रखने की रणनीति मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर उनकी प्रतिक्रिया सामने आ सकती है। वहीं राजनीतिक दल इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं, जिससे यह विवाद आगे और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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