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वीरान हुआ पुराना मॉल
दिल्ली का ऐतिहासिक मॉल अब सुनसान नजर आने लगा
कभी दिल्ली की पहचान रहा अंसल प्लाजा अब वीरान, घटती रौनक से बढ़ी चिंता
23 Feb 2026, 11:00 AM
Delhi
-
New Delhi
Reporter :
Mahesh Sharma
New Delhi
राजधानी दिल्ली का कभी लोकप्रिय शॉपिंग सेंटर रहा Ansal Plaza आज वीरानी का प्रतीक बनता जा रहा है। एक समय यह मॉल शहर की आधुनिक जीवनशैली और बदलते शॉपिंग कल्चर की पहचान माना जाता था, लेकिन अब यहां सन्नाटा और खाली दुकानें देखने को मिलती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जहां भीड़ उमड़ती थी, वहां अब मुश्किल से कुछ लोग नजर आते हैं।
साल 1999 में दक्षिण दिल्ली में शुरू हुआ यह मॉल राजधानी के शुरुआती बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में शामिल था। उस समय दिल्ली में मॉल संस्कृति नई थी और अंसल प्लाजा लोगों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया था। यहां फैशन स्टोर्स, फूड आउटलेट और मनोरंजन सुविधाएं लोगों को खींचकर लाती थीं। सप्ताहांत पर यहां बड़ी संख्या में परिवार और युवा पहुंचते थे।
समय के साथ स्थिति बदलती चली गई। शहर में नए और आधुनिक मॉल बनने लगे, जिनमें बेहतर सुविधाएं और अधिक विकल्प उपलब्ध थे। इससे अंसल प्लाजा की लोकप्रियता धीरे-धीरे कम होती गई। नए मॉल में मल्टीप्लेक्स, बड़े फूड कोर्ट और आधुनिक ढांचा होने के कारण लोग वहां ज्यादा जाने लगे।
आज मॉल के आसपास का माहौल भी पहले जैसा नहीं रहा। रात के समय यहां रोशनी कम रहती है और कई जगहों पर सुनसान माहौल देखने को मिलता है। पार्किंग क्षेत्र, जहां पहले वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती थीं, अब अक्सर खाली दिखाई देता है। इससे सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं जताई जा रही हैं।
मॉल परिसर में मौजूद कुछ दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों की संख्या लगातार कम होती गई, जिससे व्यापार प्रभावित हुआ। कई दुकानों को बंद करना पड़ा और धीरे-धीरे मॉल की रौनक खत्म होती चली गई। कुछ लोगों का मानना है कि रखरखाव की कमी और बदलती उपभोक्ता आदतों ने भी इस स्थिति को जन्म दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी विकास के साथ पुराने व्यावसायिक केंद्रों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। यदि समय के साथ सुविधाओं को अपडेट नहीं किया जाए, तो ऐसे स्थानों की लोकप्रियता कम हो जाती है। अंसल प्लाजा इसका एक उदाहरण माना जा रहा है।
हालांकि कुछ दुकानदार और स्थानीय निवासी उम्मीद जता रहे हैं कि यदि यहां बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया जाए और नए व्यावसायिक विकल्प लाए जाएं, तो मॉल में फिर से रौनक लौट सकती है। फिलहाल यह मॉल अपने सुनहरे अतीत की याद दिलाता हुआ शांत खड़ा दिखाई देता है।
साल 1999 में दक्षिण दिल्ली में शुरू हुआ यह मॉल राजधानी के शुरुआती बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में शामिल था। उस समय दिल्ली में मॉल संस्कृति नई थी और अंसल प्लाजा लोगों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया था। यहां फैशन स्टोर्स, फूड आउटलेट और मनोरंजन सुविधाएं लोगों को खींचकर लाती थीं। सप्ताहांत पर यहां बड़ी संख्या में परिवार और युवा पहुंचते थे।
समय के साथ स्थिति बदलती चली गई। शहर में नए और आधुनिक मॉल बनने लगे, जिनमें बेहतर सुविधाएं और अधिक विकल्प उपलब्ध थे। इससे अंसल प्लाजा की लोकप्रियता धीरे-धीरे कम होती गई। नए मॉल में मल्टीप्लेक्स, बड़े फूड कोर्ट और आधुनिक ढांचा होने के कारण लोग वहां ज्यादा जाने लगे।
आज मॉल के आसपास का माहौल भी पहले जैसा नहीं रहा। रात के समय यहां रोशनी कम रहती है और कई जगहों पर सुनसान माहौल देखने को मिलता है। पार्किंग क्षेत्र, जहां पहले वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती थीं, अब अक्सर खाली दिखाई देता है। इससे सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं जताई जा रही हैं।
मॉल परिसर में मौजूद कुछ दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों की संख्या लगातार कम होती गई, जिससे व्यापार प्रभावित हुआ। कई दुकानों को बंद करना पड़ा और धीरे-धीरे मॉल की रौनक खत्म होती चली गई। कुछ लोगों का मानना है कि रखरखाव की कमी और बदलती उपभोक्ता आदतों ने भी इस स्थिति को जन्म दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी विकास के साथ पुराने व्यावसायिक केंद्रों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। यदि समय के साथ सुविधाओं को अपडेट नहीं किया जाए, तो ऐसे स्थानों की लोकप्रियता कम हो जाती है। अंसल प्लाजा इसका एक उदाहरण माना जा रहा है।
हालांकि कुछ दुकानदार और स्थानीय निवासी उम्मीद जता रहे हैं कि यदि यहां बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया जाए और नए व्यावसायिक विकल्प लाए जाएं, तो मॉल में फिर से रौनक लौट सकती है। फिलहाल यह मॉल अपने सुनहरे अतीत की याद दिलाता हुआ शांत खड़ा दिखाई देता है।
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