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भर्ती घोटाले में सजा
श्रीनगर अदालत ने सुनाया अहम फैसला
जेके बैंक भर्ती घोटाले में दो पूर्व चेयरमैन दोषी, 3000 नियुक्तियों में अनियमितता साबित
18 Feb 2026, 12:48 PM Jammu and Kashmir - Srinagar
Reporter : Mahesh Sharma
Srinagar श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर बैंक भर्ती घोटाले में बड़ा फैसला सुनाते हुए श्रीनगर की एक स्थानीय अदालत ने Jammu & Kashmir Bank के दो पूर्व चेयरमैन को दोषी करार दिया है। अदालत ने पाया कि बैंक में करीब 3000 नियुक्तियों में अनियमितताएं हुईं और बैकडोर तरीके से भर्तियां की गईं।

दोषी ठहराए गए अधिकारियों में पूर्व चेयरमैन मुश्ताक अहमद शेख और परवेज अहमद नेंगुरू शामिल हैं। इनके अलावा कुछ अन्य अधिकारियों को भी मामले में दोषी पाया गया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोपों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं।

यह मामला बैंक में कथित रूप से नियमों को दरकिनार कर की गई भर्तियों से जुड़ा है। आरोप था कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और योग्य उम्मीदवारों की अनदेखी कर सिफारिश के आधार पर नियुक्तियां दी गईं। जांच के दौरान कई दस्तावेज, नियुक्ति रिकॉर्ड और आंतरिक पत्राचार की जांच की गई।

मामले की जांच Anti-Corruption Bureau (एसीबी) ने की थी। एसीबी ने वर्ष 2019 में एक शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की थी। जांच एजेंसी ने बैंक अधिकारियों से पूछताछ की, दस्तावेज जब्त किए और चयन प्रक्रिया की समीक्षा की। लंबी जांच के बाद आरोपपत्र अदालत में पेश किया गया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सार्वजनिक संस्थानों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोपरि है। यदि उच्च पदों पर बैठे अधिकारी ही नियमों का उल्लंघन करें, तो इससे संस्थान की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दोषियों के खिलाफ सजा पर अगली सुनवाई में निर्णय लिया जाएगा।

इस फैसले को प्रशासनिक सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकिंग और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए यह निर्णय मिसाल बन सकता है।

घोटाले के उजागर होने के बाद से ही जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा जारी थी। हजारों अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि उन्हें निष्पक्ष अवसर नहीं मिला। अब अदालत के फैसले के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं में सख्ती बरती जाएगी।

फिलहाल, दोषी करार दिए गए अधिकारियों की सजा तय होना बाकी है, लेकिन यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई संभव है, चाहे आरोपी कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों।
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