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कश्मीर में मौसम बदलाव
कश्मीर में सामान्य से पहले तापमान बढ़ने के संकेत मिले
कश्मीर में समय से पहले बदला मौसम बर्फ पिघली और बादाम के फूल जल्दी खिले
23 Feb 2026, 11:58 AM
Jammu and Kashmir
-
Srinagar
Reporter :
Mahesh Sharma
Srinagar
कश्मीर घाटी में इस वर्ष मौसम का मिजाज सामान्य से अलग नजर आ रहा है। कुछ ही समय पहले तक जहां पूरी घाटी बर्फ की सफेद चादर से ढकी हुई थी, वहीं अब अचानक तापमान बढ़ने से बर्फ तेजी से पिघलने लगी है। मौसम में आए इस अप्रत्याशित बदलाव ने स्थानीय किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है।
फरवरी के शुरुआती दिनों में कश्मीर के कई हिस्सों में अच्छी बर्फबारी हुई थी, जिससे ठंड लंबे समय तक बने रहने की उम्मीद थी। लेकिन कुछ ही दिनों बाद तापमान में अचानक वृद्धि होने लगी और बर्फ का स्तर तेजी से कम हो गया। घाटी के कई इलाकों में अब मैदान और बाग-बगीचे दिखाई देने लगे हैं, जो आमतौर पर इस समय तक बर्फ से ढके रहते हैं।
मौसम में आए बदलाव का सबसे स्पष्ट असर बादाम के बागानों में देखने को मिल रहा है। घाटी में बादाम के पेड़ों पर इस बार सामान्य समय से लगभग दो सप्ताह पहले फूल खिल गए हैं। बादाम के फूलों को कश्मीर में बसंत के आगमन का संकेत माना जाता है, लेकिन इस बार उनका समय से पहले खिलना मौसम के असामान्य व्यवहार की ओर इशारा कर रहा है।
हालांकि पर्यटक इस दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं, लेकिन किसानों और बागवानों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में दोबारा ठंड बढ़ती है या पाला पड़ता है, तो समय से पहले खिले फूलों को नुकसान पहुंच सकता है। इससे बादाम और अन्य फलों के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम चक्र में बदलाव देखने को मिल रहा है। तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव से फसलों और बागवानी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से फलदार पेड़ों के लिए स्थिर मौसम बेहद जरूरी होता है, क्योंकि समय से पहले फूल आने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि मौसम इसी तरह अस्थिर रहा तो आने वाले समय में खेती और बागवानी करना और मुश्किल हो सकता है। प्रशासन और कृषि विभाग भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कश्मीर में मौसम के बदलते रुझान भविष्य के लिए संकेत दे रहे हैं। यदि तापमान में असामान्य वृद्धि का सिलसिला जारी रहा तो इसका असर पर्यावरण, कृषि और जल संसाधनों पर भी पड़ सकता है।
फरवरी के शुरुआती दिनों में कश्मीर के कई हिस्सों में अच्छी बर्फबारी हुई थी, जिससे ठंड लंबे समय तक बने रहने की उम्मीद थी। लेकिन कुछ ही दिनों बाद तापमान में अचानक वृद्धि होने लगी और बर्फ का स्तर तेजी से कम हो गया। घाटी के कई इलाकों में अब मैदान और बाग-बगीचे दिखाई देने लगे हैं, जो आमतौर पर इस समय तक बर्फ से ढके रहते हैं।
मौसम में आए बदलाव का सबसे स्पष्ट असर बादाम के बागानों में देखने को मिल रहा है। घाटी में बादाम के पेड़ों पर इस बार सामान्य समय से लगभग दो सप्ताह पहले फूल खिल गए हैं। बादाम के फूलों को कश्मीर में बसंत के आगमन का संकेत माना जाता है, लेकिन इस बार उनका समय से पहले खिलना मौसम के असामान्य व्यवहार की ओर इशारा कर रहा है।
हालांकि पर्यटक इस दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं, लेकिन किसानों और बागवानों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में दोबारा ठंड बढ़ती है या पाला पड़ता है, तो समय से पहले खिले फूलों को नुकसान पहुंच सकता है। इससे बादाम और अन्य फलों के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम चक्र में बदलाव देखने को मिल रहा है। तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव से फसलों और बागवानी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से फलदार पेड़ों के लिए स्थिर मौसम बेहद जरूरी होता है, क्योंकि समय से पहले फूल आने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि मौसम इसी तरह अस्थिर रहा तो आने वाले समय में खेती और बागवानी करना और मुश्किल हो सकता है। प्रशासन और कृषि विभाग भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कश्मीर में मौसम के बदलते रुझान भविष्य के लिए संकेत दे रहे हैं। यदि तापमान में असामान्य वृद्धि का सिलसिला जारी रहा तो इसका असर पर्यावरण, कृषि और जल संसाधनों पर भी पड़ सकता है।
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