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अलीनगर हेल्थ सेंटर की सच्चाई
एक डॉक्टर के भरोसे 20 गांवों का इलाज
अलीनगर के हेल्थ सेंटर की जमीनी हकीकत, विधायक के दावे पर उठे सवाल
11 Feb 2026, 02:05 PM Bihar - Darbhanga
Reporter : Mahesh Sharma
Darbhanga दरभंगा जिले के अलीनगर विधानसभा क्षेत्र स्थित कुरसो नदियामि गांव का हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर इन दिनों चर्चा में है। क्षेत्र की विधायक मैथिली ठाकुर ने विधानसभा में इस स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली का मुद्दा उठाया था, जिसके बाद सरकार की ओर से जवाब दिया गया कि केंद्र में एक आयुष डॉक्टर तैनात हैं और भवन केवल मरम्मत की स्थिति में है। हालांकि, जमीनी पड़ताल में तस्वीर कुछ और ही नजर आई।

स्थल पर पहुंचने पर पाया गया कि अस्पताल का नया भवन सीमित संसाधनों के साथ संचालित हो रहा है। स्वास्थ्य केंद्र सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक ही खुलता है। दोपहर बाद परिसर में ताला लग जाता है। यहां केवल एक आयुष चिकित्सक तैनात हैं, जबकि पहले स्वीकृत दो एमबीबीएस डॉक्टरों के पद फिलहाल खाली हैं।

डॉक्टर त्रिवेश गोइत ने बताया कि एमबीबीएस डॉक्टरों के पद आज भी स्वीकृत हैं, लेकिन नियुक्ति नहीं हो सकी है। ऐसे में सामान्य बीमारियों का इलाज तो किया जाता है, परंतु गंभीर मामलों और प्रसव सेवाओं के लिए मरीजों को दरभंगा रेफर करना पड़ता है।

पुराने अस्पताल भवन की स्थिति और भी चिंताजनक है। छत से प्लास्टर झड़ चुका है, लोहे की सरिया बाहर दिखाई दे रही है और परिसर में मलबा फैला है। भवन अब उपयोग लायक नहीं रहा। अस्पताल परिसर में बने सरकारी आवास भी जर्जर हालत में हैं। दरवाजे और खिड़कियां टूटी हुई हैं, जिससे वहां कोई चिकित्सक या कर्मचारी रहना नहीं चाहता।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि करीब 20 गांवों के लोग इस केंद्र पर निर्भर हैं। पुण्यानंद चौधरी के अनुसार, पहले यहां पर्याप्त स्टाफ और सुविधाएं थीं, लेकिन अब स्थिति काफी बदल चुकी है। महिला दाई इंद्रा देवी ने प्रसव सुविधा बहाल करने और महिला मरीजों के लिए स्थायी व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि गर्भवती महिलाओं को दूर के अस्पतालों में जाना पड़ता है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है।

रविंद्र झा और देवेंद्र कामत जैसे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वर्षों से अस्पताल की हालत सुधारने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। उनका कहना है कि गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता और कई बार रास्ते में ही हालत बिगड़ जाती है।

जमीनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि सरकार की ओर से आयुष डॉक्टर की तैनाती की बात सही है, लेकिन एमबीबीएस डॉक्टरों की कमी और प्रसव सेवाओं का अभाव वास्तविक समस्या है। भवन की मरम्मत और स्थायी स्टाफ की नियुक्ति की आवश्यकता भी सामने आई।

अब सवाल यह है कि क्या यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगा या स्वास्थ्य विभाग ठोस सुधारात्मक कदम उठाएगा। फिलहाल, अलीनगर के इस स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति ग्रामीण चिकित्सा व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर कर रही है।
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